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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 35, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

विदुर्देवं तदाभासं सर्वसत्तार्थदं तथा । स हरिः स शिवः सोऽजः स ब्रह्मा स सुरेश्वरः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

चिति की अभिव्यक्ति में उत्कर्ष के कारण ही हरि, हर आदि देवताओं में भी उत्कृष्ट देवरूपता है, इस आशय से कहते हैं। वही हरि है, वही शिव है, वही हिरण्यगर्भ है, वही चतुर्मुख ब्रह्मा है, वही देवताओं का पति इन्द्र है, वही वायु, अग्नि, चन्द्र एवं सूर्यरूप है और वही परमेश्वररूप है