Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 35, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

अनिलानलचन्द्रार्कवपुः स परमेश्वरः । स एष सर्वगो ह्यात्मा चित्खनिश्चेतनः स्मृतः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

वही सर्वत्र व्यापक आत्मा है, सर्वचैतन्याकार चेतन है, देवेश देवभृत्‌, धाता, देवदेव और स्वर्गस्वामी है