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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 37, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

परमाकाशनगरनाट्यमण्डपभूमिषु । स्वशक्तिवृत्तं संसारं पश्यन्ती साक्षिवत्स्थिता ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

वही चितिसत्ता गन्धर्वनगर के नाट्य-मण्डप की भूमिरूप जाग्रत्‌ आदि अवस्थाओं में अपनी शक्ति से जनित यह संसार देखती हुई साक्षी की नाई उदासीन होकर अवस्थित रहती है