Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 37, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

एवं जगति नृत्यन्ति ब्रह्माण्डे नृत्यमण्डपे । कालेन नर्तकेनेव क्रमेण परिशिक्षिताः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

गमनशील ब्रह्माण्डरूपी नृत्य-मण्डप मेँ ऋतु, मास आदि काल-नियति-क्रम द्वारा महाकालरूपी नट से उत्तम रीति से शिक्षित हुई उस प्रकार की शक्तिरूपिणी नटियाँ नाचती हैं