Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 37, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ज्ञत्वकर्तृत्वभोक्तृत्वसाक्षित्वादिविभावनात् ।
शक्तयो विविधं रूपं धारयन्ति बहूदकम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञातृत्व, कर्तृत्व, भोक्तृत्व, साक्षित्व आदि कल्पनाओं से
परमात्मा की ये शक्तियाँ उस प्रकार विविध स्वरूप धारण करती हैं, जिस प्रकार तरंग आदि
भेदकल्पनाओं से जल विविधरूप धारण करता है