Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
ईश्वर उवाच ।
एष देवः स परमः पूज्य एष सदा सताम् ।
चिन्मात्रमनुभूत्यात्मा सर्वगः सर्वसंश्रयः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्री महेश्वर ने कहा : महर्ष, नियति के नाटक का साक्षीभूत यह चिदात्मा ही सबसे बडा देव है, यही
देव सदा साधुजनो के पूजनयोग्य है यही समस्त वस्तुओं का आश्रय, सर्वव्यापी, चिन्मात्ररूप तथा
अनुभवात्मक हे
सर्ग सन्दर्भ
सैंतीसवाँ सर्ग समाप्त अड़तीयवाँ सर्ग अनन्त चिन्मात्रस्वरूप महादेवजी का बाह्य ध्यान से पूजन ओर ज्ञान से महापुण्यात्मक मुक्तिरूप फल इसका वर्णन |