Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
घटे पटे वटे कुड्ये शकटे वानरे स्थितः ।
शिवो हरो हरिर्ब्रह्मा शक्रो वैश्रवणो यमः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
आगे कही जानेवाली रीति से किये गये उसके पूजन में सम्पूर्ण देवताओं का पूजन अन्तभूतहो
जाता है, इस आशय से उसकी सर्वरूपता बतलाते हैं।
यही देव घड़े में, कपड़े में, वट में, दीवार में, शकट में ओर वानर में स्थित हे । वही परम देव शिव,
हर, हरि, ब्रह्मा, इन्द्र, कुबेर ओर यम स्वरूप हे