Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
घटिकां पूजयेद्यस्तु राजसूयं लभेत सः ।
मध्याह्नपूजनादित्थं राजसूयैकलक्षभाक् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार मध्याहनकाल तक पूजन करने से एकलक्ष
राजसूय यज्ञों का फल प्राप्त होता है। और इसी प्रकार दिनभर पूजन करने से तो मनुष्य परमधाम में
वास करता है (क्योकि चिरकाल तक एकाग्रता होने पर ज्ञान का उदय अवश्य ही होगा ।)