Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
दिवसं पूजयित्वैवं परे धाम्नि वसेन्नरः ।
एषोऽसौ परमो योग एषा सा परमा क्रिया ।
बाह्यसंपूजनं प्रोक्तमेतदुत्तममात्मनः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, जो यह आत्मदेव का उत्तम बाह्मपूजन मैंने तुमसे कहा है, यही परम योग है, यही वह परम
(उत्तम) कर्म है