Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
बहिस्तावन्महाबुद्धे क्रमेण परिपूज्यते ।
येन तच्छृणु तत्त्वज्ञ श्रोष्यस्यन्तःक्रमं ततः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबुद्धे, जिस बाह्य क्रम से इस आत्मदेव का पूजन किया जाता है, उसे पहले
सुनो । ओर तदनन्तर हे तत्त्वज्ञ, तुम पूजन का आभ्यन्तर क्रम सुनोगे