Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
पूजाक्रमेषु सर्वेषु देहगेहं पवित्रकम् ।
त्याज्यं देहावबोधात्म परं यत्नात्पवित्रकम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्ष, पूजन के जितने क्रम
हैं, उन सबमें पहले शास्त्रोक्त संस्कार एवं स्नान, आचमन आदि से पवित्र हुआ भी यह देहरूप घर
प्रयत्नपूर्वक छोड देना चाहिए और देह के साक्षी परम पवित्र चित्प्रकाशस्वरूप का, प्रयत्नपूर्वक परिशोधन
कर ग्रहण करना चाहिए