Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 38, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अनन्तदिक्तटाभोगभुजमण्डलमण्डितम् ।
नानाविधमहालोकगृहीतपरमायुधम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
सीमाशून्य दिशाओं के किनारों का यह जो विस्तार है, वही उसका भुजमण्डल है ओर उसी से वह
राजित है; उन हाथों में उसने विविध ब्रह्माण्डों में विद्यमान बड़े-बड़े सत्य आदि लोकरूप श्रेष्ठ आयुधो
का ग्रहण किया हे