Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विकल्पिन्यविकल्पे च द्विविधे वाक्पथे स्थितम् ।
तिले तैलमिवाङ्गेषु सर्वेष्वेवान्तरं स्थितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
लिंग की उपासना करना चाहिए)