Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सहस्तपादावयवः सकेशनखदन्तकः ।
स्वदेहसंविदाभासो देवोऽयमिति भावयेत् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
यह परम शिवस्वरूप आत्मदेव हाथ, पैर आदि
अवयवो से युक्त हे, केश, नख एवं दाँतों से समलंकृत है और जिसकी स्वदेहसंवित्तिर्यो ही परिचायिका
हैं, ऐसे इस देव की उपासना करनी चाहिए