Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
प्रत्यक्चेतनमात्मीयमर्थित्वेन पुनः स्थितम् ।
पदार्थानामुपेत्याशु क्षणाद्द्वित्वमिवागतम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो स्वकीय
प्रत्यगात्मस्वरूप है अपना स्वरूप भूल जाने के कारण जो भोगादिरूप से स्थित है ओर जो स्वयं ही
अपने से अतिरिक्त पदार्थो का वेष धारण कर शीघ्र अपने संकेत से मानों द्वित्व प्राप्त कर स्थित हे (ऐसे
बोधलिंगस्वरूप शिव का ध्यान करना चाहिए)