Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रममलाभासं कलाकलनकल्पनम् ।
प्रत्यक्षदृश्यं सर्वत्र स्वानुभूतिमयात्मकम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो चैतन्यमात्रस्वरूप ओर निर्मल
आभासस्वरूप है,जो अध्यासरूप विकल्पों का अधिष्ठान है, जो सर्वत्र प्रत्यक्ष-दुश्य है तथा जो अपने
अनुभव का स्वरूप है (उस बोधरूप लिंग की उपासना करनी चाहिए)