Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
भक्ष्यभोज्यान्नपानेन नानाविभवशालिना ।
शयनासनयानेन यथाप्तेनार्चयेच्छिवम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
अनायास प्राप्त भक्ष्य, भोज्य ओर अन्नपान से
तथा विविध एश्वर्य से युक्त शयन, आसन एवं सवारी से उस शिव की पूजा करे