Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
प्राप्तदेहतया नित्यं तथार्थक्रिययाऽनया ।
कामसंसेवनेनाऽथ पूजयेच्छोभनं विभुम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राप्त हुए ब्राह्मण, क्षत्रिय, आदि रूप अपने शरीर
के लिए उचित शास्त्रानुसार इन व्यवहारों से और देह-धारण के निमित्तभूत अन्न-पान आदि से उस
सुन्दर आत्मदेव की नित्य पूजा करनी चाहिए