Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
अयं सोहमयं नाहं विभागमिति संत्यजेत् ।
सर्वं ब्रह्मेति निश्चित्य नित्यात्मार्चाव्रतं चरेत् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
“यह वही में हूँ” ओर “यह मैं नहीं हूँ” इस प्रकार के भेद को छोड देना चाहिए तथा
“यह सब ब्रह्म ही है" इस प्रकार निश्चय कर निरन्तर आत्मपूजारूप व्रत का आचरण करना चाहिए