Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
सर्वदा सर्वरूपेण सर्वाकारविकारिणा ।
सर्वं सर्वप्रकारेण प्राप्तेनात्मानमर्चयेत् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
यथा प्राप्त सव तरह के आकाररूप विकारों से युक्त सभी प्रकारो एवं समस्त रूप और नामों से सर्वात्मक
उस आत्मदेव का सदा पूजन करना चाहिए