Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
अन्तराकाशविशदो बहिःप्रकृतकार्यकृत् ।
रञ्जनामिहिकामुक्तः संपूर्णो ज्ञ उपासकः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
भीतर आकाश की तरह विशाल
ओर बाहर प्राकृत कार्यो को करनेवाला, रंजनारूप हिम से मुक्त एवं पूर्ण जो तत्त्वज्ञ है, वही मेरा मुख्य
पूजक है