Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 39, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
पूर्णेन्दुनेव पूर्णेन भाव्यं समसमत्विषा ।
स्वच्छेन चिद्धनैकेन ज्ञेनाप्युपलरूपिणा ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
चैतन्यमात्रस्वरूप, अद्वितीय ज्ञानी को भी पूर्णचन्द्र की नाई परिपूर्ण, समता से समानप्रकाशयुक्त,
स्वच्छ ओर स्फटिकशिला की नाई निर्मल एवं दृढ़ होना चाहिए