Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 4, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 4, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अचित्तत्वं गते चित्ते क्षीयते वासनाभ्रमः ।
हारमुक्तासमावेशश्छिन्ने तन्ताविवानघ ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पापरहित
श्रीरामजी, जैसे सूत्र के टूट जाने पर हार के मोतियों का सन्निवेश नष्ट हो जाता है, वैसे ही चित्त के
अचित्तरूप हो जाने पर वासनाभ्रम नष्ट हो जाता है