Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 4, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 4, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
मौर्ख्ये क्षीणे क्षतं विद्धि चित्तं राम सबान्धवम् ।
विलीनाम्बुधरे व्योम्नि जाड्यं शाम्यत्यविघ्नतः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जैसे आकाश में मेघ के शांत हो जाने पर शेत्य अनायास नष्ट हो जाता हे, वैसे ही मूर्खता
का (अज्ञान का) विनाश हो जाने पर सपरिवार चित्त अनायास नष्ट हो जाता है