Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 40, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
पूज्यपूजाद्यवच्छिन्नो देवो नित्यामलात्मनः ।
सर्वशक्तेरनन्तस्य नेश्वरत्वस्य भाजनम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, जो देव पूज्य, पूजा आदि त्रिपुटी से युक्त हे, वह सदा निर्मलस्वरूप, समस्त
शक्तियों से परिपूर्णं एवं अनन्तस्वरूप ईश्वरत्व का आधार नहीं हो सकता