Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 40, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
देशकालपरिच्छिन्नो येषां स्यात्परमेश्वरः ।
अस्माकमुपदेश्यास्ते न विपश्चिद्विपश्चिताम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे विद्वान, जिन विद्वानों के मत में देश, काल आदि
से परिच्छिन्न ईश्वर माना जाता हे, वे हम लोगों के तत्त्वोपदेश के पात्र नहीं है