Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 40, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तेनैवाह्लादमायाति याति प्रकटतां तथा ।
तथा स्थितेन रूपेण स्वेनैव स्वयमीश्वरः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
किस कारण यह आत्मा का पूजन होता है ? इस पर कहते हैं।
उस प्रकार के पूजन से ही आत्मा अपने पारमार्थिक निरतिशय आनन्दस्वरूप की अभिव्यक्ति
प्राप्त करता है और स्व-स्वरूप से ही स्वयं यह ईश्वररूप जीवात्मा आविद्यक आवरणों का अभाव भी
प्राप्त करता हे