Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्सत्किंचिन्न किंचिच्च शून्यं विज्ञानमेव च ।
इत्यादिभेदो भगवंस्त्रिलोकेश किमुच्यते ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे तीनों लोकों के स्वामिन् भगवन्, “ॐ तत्सदिति निर्देशो
ब्रह्मण स्त्रिविध: स्मृतः ।* इत्यादि व्यपदेशं में “तत्, "सत्", "किंचित्", “न किंचित्", 'शून्य” और
"विज्ञान" आदि भेद यानी एक-दूसरे से एक दूसरे का भेद करनेवाले प्रवृत्ति निमित्त अर्थो से युक्त
नामविशेष कैसे कहे जाते हैँ (इसे कृपाकर बतलाइए)