Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एवमेतज्जगत्तत्त्वं स्वं तत्त्वं शिवनामकम् ।
सर्वथा सर्वदा सर्वसर्वं यत्सुखमास्व भो ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे वसिष्ठजी, इस तरह आकाश आदि जगत् के आरोप का अधिष्ठान होने से यह
जगत्तत्त्व एवं तीनों अवस्थाओं के आरोप का अधिष्ठान होने से शिवनामक स्व-तत््व, जो सर्वदा सब
तरह से सम्पूर्ण वस्तुओं के सब भावों का निर्वाहक है, केवल ब्रह्मसुखरूप ही है, अणुमात्र भी दूसरा नहीं
है, यह निश्चय कर आप स्थित हो जाइए