Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 41, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
शिव आत्मा परं ब्रह्मेत्यादिशब्दैस्तु भिन्नता ।
पुरातनैर्विरचिता तस्य भेदो न वस्तुतः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राचीन लोगों ने शिव, आत्मा ओर परब्रह्म इत्यादि
नामों से भिन्नता की रचना की है, वस्तुतः उसमें कुछ भी भेद नहीं हे