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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

परमाणौ परमाणौ व्योम्नि व्योम्नि क्षणे क्षणे । सर्गकल्पमहाकल्पभावाभावा भवन्ति ते ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

परमाणु-परमाणु में, व्योम-व्योम में (महाकाश और सुई के छेद आदि आकाश में) तथा क्षण-क्षण में भी वे सृष्टि, कल्प ओर महाकल्प के आविर्भाव ओर तिरोभाव हुआ करते हैं