Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
निमेष एव कल्पो यो महाकल्पपरम्पराम् ।
प्रतिभासविपर्यासमात्रेणानुभवत्यलम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वह निमेष ही कल्पना में समर्थ है, जो केवल प्रतिभास के विपर्यास से यानी
पराकृप्रवणता से महाकल्पों की परम्परा का भलीभाँति अनुभव करता है