Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्वं संकल्परूपेण चिच्चमत्कुरुते चिति ।
स्वप्नपत्तननिर्माणपातोत्पातनवज्जगत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्बन्ध नहीं करता