Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
रुद्राद्यास्तृणपर्यन्ताः संपद्यन्ते क्षणं प्रति ।
परमाणूपमाः सन्ति तथा केचिदणूपमाः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई सर्ग वासना की सूक्ष्मता
के कारण परमाणु के सदृश सूक्ष्म हैं और कोई सर्ग वासना के स्वल्प विकास से त्रसरेणु के सदृश बड़े हैं,
यही क्रम भूत एवं भावी सर्ग के विषय में भी जानना चाहिए