Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्त्वा नीलकण्ठोऽसौ त्यक्तपुष्पाञ्जलौ मयि ।
ततार परिवारेण सममम्बरकोटरम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, ये नीलकण्ठ भगवान्
शंकर ऐसा कहकर, जिनके ऊपर मैंने उस समय पुष्पांजलि समर्पित कर दी थी, अपने परिवार के
साथ आकाश कोटर की ओर उड़ गये