Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
यथापृष्टं मुने प्रोक्तं त्वयि कल्याणमस्तु ते ।
दिशं प्रयामोऽभिमतामागच्छोत्तिष्ठ पार्वति ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, जैसा तुमने पूछा, वैसा ही मैंने उत्तर
भी दिया । तुम्हारा कल्याण हो । अब हम लोग अपनी अभिमत दिशा की ओर जा रहे हैं । हे
पार्वतीजी, आइये, उठिये