Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 42, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 42, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तत्त्वसद्रूपमखिलं शून्यवेतालको यथा ।
भ्रमदृष्ट्या तु सद्रूपमित्यहंता जगद्गतिः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस तरह शून्यस्वरूप वेताल तात्त्विक दृष्टि से असद्रूप और भ्रमदृष्ट से सद्रूप
भासता है, उसी प्रकार यह समस्त प्रपंच तत्त्वदृष्टि से असत् ओर भ्रमदृष्टि से सद्रूप भासता है, इसलिए
जगत् का विज्ञान केवल अहन्ता ही है