Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सुखदुःखे न कर्तव्ये धनबन्धूदयक्षये ।
एवंप्राया एव सर्वा नित्यं संसारदृष्टयः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, धन और बन्धुओं का आगम ओर अपाय होने पर
हर्ष और विषाद नहीं करना चाहिए, क्योकि ये सभी संसार के अनुभव सदा विनश्वर ही हैं