Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
न तास्तव न तासां त्वं निर्मलान्तर्जगत्क्रियाः ।
इदमित्थं जगत्किंचित्किं मुधा परितप्यसे ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निर्मल, वे जगत् के व्यवहार न तो आपके अन्दर हैं और न आप ही उनके अन्दर हैँ ।
इस प्रकार यह जगत् तुच्छ ही है, इसलिए आप क्यों व्यर्थ संतप्त होते हैँ ?