Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यत्पृष्टं प्रथमे कल्पे तदद्य परिचोदय ।
श्रीराम उवाच ।
इदानीं संशयो ब्रह्मन्विनिवृत्तो विशेषतः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने
कहा : ब्रह्मन्, आज मेरा संशय विशेषरूप से निवृत्त हो गया । मेने समस्त ज्ञातव्य तत्त्व जान लिया ओर
मुझे स्वाभाविक तृप्ति भी हो गई