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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

भ्रान्तिरासीदिदानीं सा निवृत्ता त्वत्प्रसादतः । न जायते न म्रियते न चैवात्मा कलङ्कितः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

न तो आत्मा उत्पन्न होता है, न मरता है ओर न कलंकयुक्त ही रहता हे । “यह सब जगत्‌ ब्रह्ममय है” इस प्रकार का साक्षात्कार हो जाने से मैं भलीभाँति उदय को प्राप्त हो गया हूँ