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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verses 25–26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verses 25–26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

सर्वं च खल्विदं ब्रह्ममयमित्युदितोऽस्म्यलम् । प्रश्नेभ्यः संशयेभ्यश्च वाञ्छितेभ्यश्च सर्वतः ॥ २५ ॥ शुद्धं मे निर्मलं चेतस्त्वष्ट्रा यन्त्रभ्रमादिव । सर्वाचारोपदेशेषु प्राप्तप्रोक्तेषु साधुभिः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, सब प्रकार के प्रश्नों से, संशयो से ओर इच्छित पदार्थो से यानी सभी ओर से निवृत्त हुआ मेरा मन निर्मल हो गया ओर उस प्रकार उज्ज्वल हो गया, जिस प्रकार बढ़ई द्वारा यन्त्र पर किये तक्षण (लकड़ी गढ़कर मूर्ति बनाने की क्रिया) से लकड़ी आदि सूर्य-विम्ब से उज्ज्वल हो जाते हैं