Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
त्वत्प्रसादेन भगवंस्तीर्णाः स्मो भवसागरात् ।
संपदामवधिर्ज्ञातो दृष्टः सीमान्त आपदाम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे परमेश्वर, हमने सम्पत्तियं की
अवधि जान ली, आपत्तियों की सीमा का भी अन्त देख लिया । हमें सर्वसारभूत भूमानन्द में भी दीनता
न रही ओर अब हम परिपूर्णस्वरूप हो गये