Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
सर्वसारेऽप्यदीनाः स्मः पूर्णाः स्मः परमेश्वर ।
ययावभेद्यामपरैर्दलिताशामतङ्गजम् ।
संसारसागरे सम्यग्वीरतामागतं मनः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, अब हमारा मन इस संसाररूप समरक्षेत्र में
आशारूपी हाथियों का विदलन कर शत्रुओं से अभेद्य उत्कृष्ट वीरता को प्राप्त हो गया हे