Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 43, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 43, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अनेनार्चाविधानेन मयेमे राम वासराः ।
अखिन्नेनातिवाह्यन्ते व्यवहारपरा अपि ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस पूजन-विधान से इन व्यवहारपूर्ण दिनों को भी मैं अखिनन
होकर विता रहा हूँ