Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 44, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यत्र न स्वदते वस्तु स्वदते च यथागतम् ।
अवासनत्वं तद्विद्धि साम्यमाकाशकोमलम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अब वासनाशून्यता का स्वानुभवगम्य लक्षण बतलाते हैं।
जिस दशा में आत्मा भोगसुख का आस्वाद नहीं लेता और प्रारब्धवश प्राप्त हुए दुःख आदि का
स्वाद लेता है, उसे आकाश के सदृश कोमल, समतारूप निर्वासनत्वदशा जानिये