Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 44, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
दृश्यदर्शनसंबन्धे यत्सुखं पारमार्थिकम् ।
तदन्तैकान्तसंवित्त्या ब्रह्मदृष्ट्या मनःक्षयः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
बोधाद्रा" इससे जो मध्यम उपाय कहा गया था, उसका विवरण करते हैं।
विषय और इन्द्रियों का सम्बन्ध होने पर जो सुख अनुभूत होता है, वह परमार्थरूप से ब्रह्म-सुख
ही है। उस सुख की परमावधिभूत निरतिशयानन्दपूर्ण आत्मा की एकान्त संवित्ति से यानी ब्रह्मदृष्टि से
मन का क्षय सिद्ध हो जाता है