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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 44, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

असंवित्स्पन्दमात्रेण याति चित्तमचित्तताम् । प्राणानां वा निरोधेन तदेव च परं पदम् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

वृत्तिरूप चित्त-स्पन्दन के अभावमात्र से अथवा प्राण के निरोध से चित्त अचित्तरूपता प्राप्त करता है और वही परम पद है