Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 44, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
त्यागेन वासनांशस्य बोधाद्वा प्राणरोधनात् ।
चित्ते निस्पन्दतां याते कुतः स्पन्दस्य संभवः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनांश के त्याग से, बोध से अथवा प्राण के निरोध से चित्त के स्पन्दनरहित हो जाने पर
कूटस्थत्वप्रच्युतिरूप स्पन्दन कहाँ से उत्पन्न होगा ?