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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 44, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

स्वभावे संस्थितो राम इत्यावेदयतीव मे । सौम्य पूर्णार्णवप्रख्या समता निर्मला तव ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सौम्य श्रीरामजी, अपने चैतन्यस्वभाव में भलीभाँति अवस्थित हुए आप मानों मुझे यह प्रत्यक्ष करा रहे हैं कि पूर्ण सागर का प्रख्यापन करनेवाली यानी पूर्ण सागर के सदुश निर्मल समता आपमें विद्यमान है